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दिल्ली में ऊंट किस करवट बैठेगा, सियासी पंडित भी शंका में हैं 

मईशत के लिये दिल्ली से  विनय गोयल की रिपोर्ट 
पूरे देश की निगाहें दिल्ली पर लगी हैं कि इस बार कौन सी पार्टी बाजी मारती है। बीजेपी मोदी मैजिक के सहारे दिलली में काबिज होना चाह रही है। वहीं आम आदमी पार्टी हंुकार भर रही है। उसका कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव कां्रग्रेस की सूपड़ा साफ किया था। इस बार भाजपा को किनारे लगाना है। लेकिन वो यह भी समझती है कि यह इतना आसान भी नहीं है। मोदी ने पूरे देश से कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया। भाजपा उसी प्रभाव के तहत दिल्ली के ताज को हासिल करना चाह रही है। लेकिन यह भाजपा के लिये भी इतना आसान नहीं है क्योंकि वरिष्ठ भाजपा नेताओं व अध्यक्ष अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि मोदीजी के चमत्कार के सहारे दिल्ली विधानसभा की वैतरणी पार करने के बजाए स्थानीय विधायकों, सांसदो और इकाइयों को आपसी तालमेल रखें। विधायक व सांसद निधियों का उपयोग ऐसे करें कि आम जनता को सुविधाएं मिलें और भाजपा की ओर रुझान हो। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा मोदीजी के सहारे दिल्ली की सत्ता हासिल करने का सपना न देखे। वैसे तो एक बात बिल्कुल साफ है कि विधायक किसी भी पार्टी का हो चुनाव में जाने की दिली तमन्ना किसी की भी नहीं है। उन्हें आशंका है कि पिछली बार तो जीत गये थे। इस बार जीतेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है।
सर्वों का खेल
टीवी चैनल इस ओर इशारा कर रहें कि यदि अभी चुनाव हों तो भाजपा को सफलता मिल सकती है। जनता का रुझान पार्टी की ओर सर्वे बता रहें है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली की राह बहुत आसान है। भाजपा को जोरदार टक्कर देती दिखाई दे रही है आम आदमी पार्टी। सर्वे में आप को भी लोग पसंद कर रहे हैं। उसे 41 फीसद लोग आज भी आप को वोट करने के मूड में दिखाई दे रहे हैं। आज भी अरविंद केजरीवाल सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में माने जा रहे हैं। डा. हर्षवर्धन व पूर्व आईपीएस किरन बेदी को 20 फीसद लोग ही मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे है। इन सर्वों में कांग्रेस को सबसे बदहल स्थिति में दर्शा रहे हैं। सर्वे में कांग्रेस को केवल चार प्रतिशत लोग ही दोबारा चुनना चाहते हैं। शीला दीक्षित को भी केवल चार प्रतिशत लोग ही चैथी बार मुख्यमंत्री के रूप में पसंद आ रहे हैं।
आप का स्टिंग आपरेशन
भाजपा वैसे तो आम आदमी पार्टी को अपने मुकाबले नहीं मानती है। वहीं दूसरी ओर दूसरी ओर उनके एक वरिष्ठ नेता व विधायक शेर सिंह डागर आप के स्टिंग आपरेशन में बुरी तरह फंस चुके हैं। पार्टी ने भी उनसे किनारा कर लिया है। बेचारे धोबी के कुत्ते बन गये और घर के रहे और न ही घाट के। यहां भाजपा का दोहरा चरित्र सामने आ गया है। प्रदेश स्तरीय नेता यह बयान देते घूम रहे हैं कि डागर ने जो भी किया या कहा उससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं वहीं दूसरी ओर उनको नोटिस जारी कर तीन दिन केभीतर जवाब भी तलब कर रहे है। आप ने तो इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। आप संयोजक केजरीवाल उप राज्यपाल से मिलकर उक्त मामले में डा्रगर पर कार्रवाई करने पर दबाव बना रहे हैं। वैसे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सीडी कांड से भाजपा अंदर ही अंदर गई है। भले ही उसे स्वीकारने में आना कानी कर रही है।
शीला के बयान से पार्टी में बवाल
15 साल तक दिल्ली में सत्ता पर काबिज रहने वाली शीला दीक्षित ने यह बयान देकर पार्टी और कांग्रेसियों को सदमे में डाल दिया कि भाजपा अगर दिल्ली में सरकार बनाती है तो उन्हें खुशी होगी। उनका बयान सुनकर कांग्रेसियों को जैसे आग सी लग गई। बयान की निंदा कर नेताओं ने उनके निष्कासन की मांग सोनिया गांधी से कर डाली। वैसे अजय माकन ने यह कह कर कि यह शीलाजी की निजी राय है। बयान से पार्टी का कोई नाता नहीं है। लेकिन बात यहीं थमी। शीला दीक्षित के समर्थन अब विधायकों के साथ कुछ और लोग भी जुट रहे हैं। क्या इसका यह मतलब समझा जाये कि कांग्रेस पार्टी में भी कुछ और दिग्गज नेता शीला के साथ हैं और सही मौका देखकर चैका मारने के फिराक में हैं।

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