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देश के विचाराधीन क़ैदियों में 55% से अधिक क़ैदी मुसलमान, दलित-आदिवासी: एनसीआरबी रिपोर्ट

 

देश की 1,400 जेलों में बंद 4.33 लाख कैदियों में से 67 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं. इसके अलावा 1,942 बच्चे भी हैं जो अपनी माताओं के साथ जेल में रह रहे हैं. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर, 2016 तक कुल 4,33,003 कैदी जेल में बंद थे. इन कैदियों में 1,35,683 दोषी, 2,93,058 विचाराधीन और 3,089 निरुद्ध किए गए थे.

जेल में बंद विचाराधीन और दोषी कैदियों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. एनसीआरबी के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जेलों में सर्वाधिक 68,432 विचाराधीन कैदी हैं, जो कुल संख्या का 23.4 प्रतिशत है.

वहीँ बिहार की बात करें तो बिहार में 27,753 विचाराधीन कैदी (9.5 प्रतिशत) और महाराष्ट्र में 22,693 विचाराधीन कैदी (7.7 प्रतिशत) हैं. ये आंकड़े 2016 के अंत तक के हैं.

2015 की रिपोर्ट में एनसीआरबी ने बताया था कि देशभर में कुल विचाराधीन क़ैदियों में से 55% से अधिक क़ैदी मुसलमान, दलित या आदिवासी समुदाय से थे.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सिविल सोसाइटी समूहों ने दावा किया था कि इन समुदायों के अधिक संख्या में विचाराधीन क़ैदी होने का मतलब यह नहीं था कि इन समुदायों के लोगों में अपराध करने की संभावना ज़्यादा है बल्कि वे सिर्फ़ इसलिए जेल में है क्योंकि ख़राब आर्थिक स्थिति होने के कारण वे जमानत देने या मुक़दमें लड़ने में सक्षम नहीं है.

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